Rambriksh Benipuri Class 10th Hindi क्षितिज भाग 2 CBSE Solution

Class 10th Hindi क्षितिज भाग 2 CBSE Solution
Exercise
  1. खेतीबारी से जुड़े गृहस्थ बालगोबिन भगत अपनी किन चारित्रिक विशेषताओं के कारण साधु कहलाते थे?…
  2. भगत की पुत्रवधू उन्हें अकेले क्यों नहीं छोड़ना चाहती थी?
  3. भगत ने अपने बेटे की मृत्यु पर अपनी भावनाएँ किस तरह व्यक्त की?
  4. भगत के व्यक्तित्व और उनकी वेशभूषा का अपने शब्दों में चित्र प्रस्तुत कीजिए।…
  5. बालगोबिन भगत की दिनचर्या लोगों के अचरज का कारण क्यों थी?
  6. पाठ के आधार पर बालगोबिन भगत के मधुर गायन की विशेषताएँ लिखिए।
  7. कुछ मार्मिक प्रसंगों के आधार पर यह दिखाई देता है कि बालगोबिन भगत प्रचलित सामाजिक मान्यताओं…
  8. धान की रोपाई के समय समूचे माहौल को भगत की स्वर लहरियाँ किस तरह चमत्कृत कर देती थीं? उस…
  9. पाठ के आधार पर बताएँ कि बालगोबिन भगत की कबीर पर श्रद्धा किन-किन रूपों में प्रकट हुई है?…
  10. आपकी दृष्टि में भगत की कबीर पर अगाध श्रद्धा के क्या कारण रहे होंगे?…
  11. गाँव का सामाजिक-सांस्कृतिक परिवेश आषाढ़ चढ़ते ही उल्लास से क्यों भर जाता है?…
  12. ‘‘ऊपर की तस्वीर से यह नहीं माना जाए कि बालगोबिन भगत साधु थे।’’ क्या ‘साधु’ की पहचान पहनावे…
  13. मोह और प्रेम में अंतर होता है। भगत के जीवन की किस घटना के आधार पर इस कथन का सच सिद्ध…
  14. इस पाठ में आए कोई दस क्रिया विशेषण छाँटकर लिखिए और उनके भेद भी बताइए।…

Exercise
Question 1.

खेतीबारी से जुड़े गृहस्थ बालगोबिन भगत अपनी किन चारित्रिक विशेषताओं के कारण साधु कहलाते थे?


Answer:

बालगोबिन भगत खेतीबारी से जुड़े गृहस्थ थे, फिर भी वे साधु की श्रेणी में आते थे, क्योंकि-

(क) वे कबीरपंथी थे, और कबीर को ही अपना गुरु मानते थे।


(ख) कबीरपंथी होने के कारण वे कबीर के पदों को ही गाते थे और उनके आदर्शों पर चलते थे।


(ग) वे सभी से खरा व्यवहार रखते थे, दो टूक बात कहने में न कोई संकोच करते थे, न किसी से झगड़ते थे।


(घ) किसी अन्य की वस्तुओ को बिना पूंछे उपयोग में नहीं लेते थे।


(च) वे लालची बिलकुल भी नहीं थे।


(छ) खेतों में जो भी पैदा होता उसे कबीरपंथी मठ में ले जाते और वहाँ से जो भी मिलता उसे प्रसाद स्वरुप ग्रहण करते थे।


इस प्रकार त्याग की प्रवृत्ति और साधुता का व्यवहार उन्हें साधु की श्रेणी में खड़ा कर देता है।



Question 2.

भगत की पुत्रवधू उन्हें अकेले क्यों नहीं छोड़ना चाहती थी?


Answer:

भगत के पुत्र की मौत से आहत पुत्रवधू अपना शेष जीवन भगत की सेवा सुश्रुषा करते हुए बिताना चाहती थी। वह भगत के बुढ़ापे का एकमात्र सहारा थी, इसीलिए वह भगत को अकेला छोड़ना नहीं चाहती थी। वह जानती थी कि बुढ़ापे में बीमार होने पर भगत को भोजन और दवा देने वाला कोई नहीं है। पुत्र की मृत्यु के बाद एक पिता पर क्या बीतती है, इस बात का अंदाजा था उसे और यह भी पता था कि उनके ससुर घर में अकेले कैसे रहेंगे ?

इन्ही सब उहापोह और जिम्मेदारियों के बीच भगत की पुत्रवधू उनका सहारा बनकर रहना चाहती थी।



Question 3.

भगत ने अपने बेटे की मृत्यु पर अपनी भावनाएँ किस तरह व्यक्त की?


Answer:

अपने बेटे की मृत्यु पर भगत उत्सव मनाने की बात करते हैं। मृतक पुत्र के शव को आँगन में चटाई पर लिटाकर सफ़ेद कपडे से ढ़ककर उसके ऊपर फूल और तुलसी के पत्ते बिखेर देते हैं। शव के सिरहाने पर एक दीपक जलाकर हमेशा की ही तरह कबीर के पदों को गाने लगे। भगत अपनी पुत्रवधू को भी रोने के लिए मना करते है और कहते है कि ये उत्सव मनाने का समय है, क्यों कि आत्मा-परमात्मा का मिलन हो गया है। विरहिणी अपने प्रेमी (ईश्वर) से जाकर मिल गई है। इन दोनों के मिलन से बड़ा आनंद और कुछ नहीं हो सकता। इस प्रकार अपनी भावनाओ से भगत ने शरीर की नश्वरता और आत्मा की अमरता का भाव व्यक्त किया है।



Question 4.

भगत के व्यक्तित्व और उनकी वेशभूषा का अपने शब्दों में चित्र प्रस्तुत कीजिए।


Answer:

साठ वर्षीय बालगोबिन भगत एक गृहस्थ थे लेकिन उनमें साधु संन्यासियों के गुण भी थे। भगत एकदम गोरे-चिट्टे मँझोले कद के व्यक्ति थे, जिनके बाल पके हुए थे। उनका चेहरा हमेशा सफेद बालों से जगमगाता रहता था, किंतु संन्यासियों की तरह जटा-जूट बाल नहीं रखते थे। गले में तुलसी के जड़ की माला पहनते थे, सिर पर कबीर पंथियों की तरह टोपी पहनते थे। शरीर पर कपड़े के नाम पर बस लँगोटी हुआ करती थी। सर्दियों के दिनों में काली कमली ओढ़े रहते थे। माथे पर रामानंदी तिलक लगा रहता था। उनका व्यक्तित्व बड़ा ही सीधा सादा था। वे हमेशा अपनी भक्ति और अपनी गृहस्थी में लीन रहते थे। उनका जीवन आदर्श साधुता से परिपूर्ण था।



Question 5.

बालगोबिन भगत की दिनचर्या लोगों के अचरज का कारण क्यों थी?


Answer:

बालगोबिन भगत की दिनचर्या का प्रत्येक कार्य आर्श्चजनक होता था। क्यों कि -

(क) गृहस्त जीवन में रहते हुए उन्होंने साधुता को कभी नहीं छोड़ा।


(ख) भूलकर भी दूसरे की वस्तु बिना पूछे प्रयोग नहीं करते थे।


(ग) भोर में ही नित्य दो मील दूर जाकर नदी-स्नान कर लौटना हमेशा की तरह दिनचर्या में था। शरद ऋतु में नदी में नहाकर पोखर पर टेर लगाते देखकर लोगों को आश्चर्य होता था।


(घ) दाँत किटकिटाने वाली ठंड में टेर लगाते, खँजड़ी बजाते समय उनके माथे से श्रमबिंदु चमक उठते थे।


(च) उपवास रखकर भी पैदल ही तीस कोस दूर गंगा स्नान पर जाते थे और रास्ते में बिना कुछ खाए घर लौटते थे।


(छ) मरणासन्न स्थिति में भी वही जवानी वाली आवाज, वही नियम, लोगों को अवाक् किए बिना नहीं रहते थे।


(ज) विपरीत परिस्थिति होने के बाद भी उनकी दिनचर्या में कोई परिवर्तन नहीं आता था।


(झ) एक वृद्ध के रूप में अपने कार्य के प्रति उनकी सजगता को देखकर लोग दंग रह जाते थे।



Question 6.

पाठ के आधार पर बालगोबिन भगत के मधुर गायन की विशेषताएँ लिखिए।


Answer:

भगत जी कबीर के गीत गाते थे। उनके मधुर गायन की विशेषता यह थी कि कबीर के सीधे-सादे पद उनके कंठ से निकल कर सजीव हो उठते थे। उनकी आवाज में एक जादू था, जिसे सुनकर खेतों में काम कर रही महिलाओं के होंठ अपने आप ही थिरकने लगते थे। उनके गाने को सुनकर रोपनी करने वालों की अंगुलियाँ स्वत: चलने लगती थीं। बच्चे, बूढ़े, औरतें सभी मंत्रमुग्ध होकर झूम उठते थे। हल चलाने वाले किसानो के पैर स्वतः ही कदम ताल करने लगते थे। उनके संगीत से ऐसा लगता था कि स्वर की एक तरंग स्वर्ग की ओर जा रही है तो दूसरी तरंग लोगों के कानों की ओर। उनके गीत के प्रभाव से सारा वातावरण मनमोहक हो जाता था।



Question 7.

कुछ मार्मिक प्रसंगों के आधार पर यह दिखाई देता है कि बालगोबिन भगत प्रचलित सामाजिक मान्यताओं को नहीं मानते थे। पाठ के आधार पर उन प्रसंगों का उल्लेख कीजिए।


Answer:

बालगोबिन भगत प्रचलित मान्यताओं पर विश्वास नहीं करते थे। ऐसे उदाहरण उन्होंने जीवन में अनेक बार प्रस्तुत किए, जिनके आधार पर उनके प्रति इस धारणा को बल मिलता है, वे प्रसंग इस प्रकार हैं-

(क) मृतक पुत्र की चिता में पुत्रवधू से आग दिलवाकर उस सामाजिक परंपरा को बड़े ही साहस से नकार दिया, जो स्त्रियों का श्मशान पर जाना निषेध मानती है।


(ख) विधवा नारी के प्रति लोगों की प्राचीन धारणा यह थी कि विधवा का पुनर्विवाह धार्मिक परंपरा के विरुद्ध है, जिसे उन्होंने बड़ी सरलता और दृढ़ता से नकार दिया और पुत्रवधू के पुनर्विवाह का आदेश दे दिया।


(ग) वे साधुओं द्वारा भिक्षा माँगकर भोजन की परंपरा के भी विरोधी थे।


(घ) सामाजिक मान्यता के अनुसार उन्होंने अपने एकलौते पुत्र की मृत्यु का शोक नही मनाया।



Question 8.

धान की रोपाई के समय समूचे माहौल को भगत की स्वर लहरियाँ किस तरह चमत्कृत

कर देती थीं? उस माहौल का शब्द-चित्र प्रस्तुत कीजिए।


Answer:

धान की रोपाई के समय भगत के स्वरों की गूँज से आसपास के लोगों के हृदय मचल उठते थे। आषाढ़ मास की रिमझिम वर्षा, आकाश में बादल, ठंडी पुरवाई हवा इस सब के बीच भगत की आवाज में, कानों को झंकृत कर देने वाली स्वर-लहरियाँ सुनाई देती थीं। भगत की आवाज कान में पड़ते ही पानी में खेलते हुए बच्चे झूम उठते थे। खेत की मेड़ पर कलेवा लिए बैठी हुई औरतों के होंठ स्वयं ही स्वाभाविक रूप से कंपन करने लगते। खेतों में हल चलाते कृषकों के पैर एक ताल से उठने लगते। खेतों में रोपनी करने वालों की उँगलियाँ स्वतः ही एक विशेष क्रम में चलने लगतीं थी।



Question 9.

पाठ के आधार पर बताएँ कि बालगोबिन भगत की कबीर पर श्रद्धा किन-किन रूपों में प्रकट हुई है?


Answer:

बालगोबिन भगत कबीर को ही अपना साहब मानते थे। उनके ही निर्देशों का यथासंभव पालन करते थे। कबीर के प्रति उनकी श्रद्धा निम्नलिखित रूपों में प्रकट हुई है-

(क) भगत सिर पर सदैव कबीरपंथी टोपी पहनते थे, जो कनपटी तक जाती थी।


(ख) कबीर के रचित पदों को ही गाते थे।


(ग) वे उन्हीं के बताए आदर्शों पर चलते थे।


(घ) खेतीबारी में जो कुछ पैदा होता था, उसे पहले कबीरपंथी मठ में समर्पित करते थे और वहाँ से जो प्रसाद रूप में प्राप्त होता था, उससे ही जीवन निर्वहन करते थे।


(च) भगत पर कबीर की विचारधारा का इतना प्रभाव था कि उन्हीं की तरह रूढि़यों का विरोध करते थे।


(छ) कबीर के अनुसार मृत्यु के पश्चात् जीवात्मा का परमात्मा से मिलन होता है। बेटे की मृत्यु के बाद बाल गोबिन भगत ने भी यही कहा था। उन्होंने बेटे की मृत्यु पर शोक मानने की बजाए आनंद मनाने के लिए कहा था।



Question 10.

आपकी दृष्टि में भगत की कबीर पर अगाध श्रद्धा के क्या कारण रहे होंगे?


Answer:

भगत की कबीर पर अगाध श्रद्धा के निम्नलिखित कारण रहे होंगे -

(क) कबीर के साधु-जीवन से भगत काफी प्रभावित हुए होंगे, क्योंकि कबीर भी गृहस्थ-


जीवन में रहते हुए साधु थे।


(ख) कबीर का आडम्बरों से रहित सादा जीवन उन्हें अच्छा लगा हेगा।


(ग) भगत की स्वभावगत विचारधारा कबीर से मेल खाती होगी। कबीर भी अपने व्यवहार


में खरापन रखते थे।


(घ) कबीर परंपरा से चली आ रही कुरीतियों का विरोध करते थे तो भगत को भी


कुरीतियाँ अच्छी नहीं लगती थीं।


(च) कबीर का कामनाओं से रहित कर्मयोग का आचरण उन्हें अच्छा लगा होगा।



Question 11.

गाँव का सामाजिक-सांस्कृतिक परिवेश आषाढ़ चढ़ते ही उल्लास से क्यों भर जाता है?


Answer:

ग्राम्य जीवन अधिकांशतः कृषि आधारित जीवन है। सूखे पड़े खेतों को देख शांत पड़े कृषकों को वर्षा होने की प्रतीक्षा रहती है। वर्षा न होने तक कृषक उदासीन रहते हैं। आषाढ़ मास में जैसे ही आकाश बादल से घिर जाते हैं, वैसे ही उदासीन मन प्रफुल्लित हो उठते हैं। इसी महीने में किसान धान की रोपनी करते हैं। और बरसात धान के फसल के लिए बहुत जरूरी होती है। जैसे ही रिमझिम बारिश होती है, सूखी धरती की प्यास बुझती है, वैसे ही संपूर्ण ग्राम्य जीवन उल्लास से भर जाता है।



Question 12.

‘‘ऊपर की तस्वीर से यह नहीं माना जाए कि बालगोबिन भगत साधु थे।’’ क्या ‘साधु’ की पहचान पहनावे के आधार पर की जानी चाहिए? आप किन आधारों पर यह सुनिश्चित करेंगे कि अमुक व्यक्ति ‘साधु’ है?


Answer:

आजकल स्वभावगत साधुता की पहचान करना कठिन है। पहनावा मात्र के आधार पर किसी व्यक्ति को साधु नहीं माना जा सकता है। सच्चा साधु वही है जो-

(क) दूसरों को वाणी से शीतलता प्रदान करता है।


(ख) कर्म में परोपकार की भावना से ओत-प्रोत होता है।


(ग) जिसके मन में दूसरों के कल्याण की भावना निहित होती है।


(घ) बाह्याडंबर से दूर, सीधा-सरल स्वभाव का हो।


(च) उपदेशात्मक जीवन में जैसी दूसरों से अपेक्षा करता है, वैसा ही आचरण स्वयं भी करे।


(छ) लोभ, स्वार्थ से दूर त्याग-पूर्ण जीवन यापन करे।


(ज) भोग-विलास की छाया से दूर रहे।


अतः सांसारिक जीवन में रहते हुए भी आचरण से व्यक्ति साधु हो सकता है। यह आवश्यक नहीं है कि साधु के लिए निश्चित वेशभूषा हो।



Question 13.

मोह और प्रेम में अंतर होता है। भगत के जीवन की किस घटना के आधार पर इस कथन का सच सिद्ध करेंगे?


Answer:

‘मोह’ में व्यक्ति किंकर्तव्यविमूढ़ होता है। इसके विपरीत प्रेम में सात्विकता होती है, वह किसी के प्रति हो सकता है। प्रेम सार्वभौमिक सत्य होता है। इसमें स्वार्थ नहीं अपितु प्रिय का हित चिंतन अधिक होता है।

इसे भगत के जीवन के आधार पर इस प्रकार समझा जा सकता है-


(क) भगत को अपने बेटे से प्रेम है, मोह नहीं, क्योंकि वे बेटे की मृत्यु पर एक मोही व्यक्ति की तरह विलाप नहीं करते हैं, अपितु उनका प्रिय पुत्र इस सांसारिक बंधन से मुक्त हो गया यह मानकर गीत गाते हैं कि आत्मा-परमात्मा से मिल गई। यह तो उनके प्रिय के लिए प्रसन्नता की बात है। यहां तक की अपनी पुत्रवधू को भी खुश होने के लिए बोलते हैं।


(ख) पुत्र की मृत्यु पर उनका पुत्रवधू और अपने बुढ़ापे के सुख का मोह होता तो वे कदापि पुत्रवधू को भाई के साथ पुनर्विवाह के लिए न भेजते। अपने आत्मीय के हित के लिए उनका प्रेम प्रबल हो उठा और उसे मायके भेज दिया। इस घटना द्वारा उनका प्रेम प्रकट होता है। बालगोबिन भगत ने सच्चे प्रेम का परिचय देकर अपने पुत्र और पुत्रवधू की खुशी को ही उचित माना।



Question 14.

इस पाठ में आए कोई दस क्रिया विशेषण छाँटकर लिखिए और उनके भेद भी बताइए।


Answer:

(क) कपड़े बिलकुल कम पहनते थे।


(परिमाणवाचक क्रियाविशेषण)


(ख) किसी से झगड़ा नहीं मोल लेते थे।


(रीतिवाचक क्रियाविशेषण)


(ग) इन दिनों वे सवेरे ही उठते थे।


(कालवाचक क्रियाविशेषण)


(घ) धीरे-धीरे स्वर ऊँचा होने लगा।


(रीतिवाचक क्रियाविशेषण)


(च) हर वर्ष गंगा स्नान करने के लिए जाते।


(कालवाचक क्रियाविशेषण)


(छ) जमीन पर ही आसन जमाए गीत गाए चले जा रहे हैं।


(स्थानवाचक क्रियाविशेषण)


(ज) थोड़ा बुखार आने लगा।


(परिमाणवाचक क्रियाविशेषण)


(झ) दिन-दिन छीजने लगे।


(कालवाचक क्रियाविशेषण)


(अ) उस दिन भी संध्या में गीत गाए।


(कालवाचक क्रियाविशेषण)


(आ) हँसकर टाल देते रहे।


(रीतिवाचक क्रियाविशेषण)


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